શાયરી

શાયરી - સીએ જયેશ ભરત શાહ, કોચીન (માંડવી)

जिंदगी जारक (oxygen) की मोहताज बन गयी
इंसान की नियत फीर भी ना बदली
सांसों की बाजारी थम नहीं रही
परवरदिगार अब तूं ही दिखा कोई राह सही

वक़्त ने किया ये केसा सितम
अपनों से ना मिलने का है बड़ा ग़म
इंसान ने किया है कोई ऐसा जुर्म
जिसकी सज़ा ख़ुदा भी कर ना सका कम.

मोत की लेहेर छायी है चारों ओर
फिर भी लूटेरों का चल रहा हे जोर
अपनों ने गंवाया हे अपनों का शोर
इस सन्नाटे में यूंही चल रही हे जीवन की डोर

वक़्त नाजुक हे पर‌ इरादे हे पक्के
मुश्किल घड़ी में जिएंगे हक से
यह दौर भी गुजर जायेगा जल्द से
तूं हिम्मत ना हार दुआ कर रब से

KUTCH GURJARI

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