सत्य घटना

सत्य घटना - ज्योति अशोक महेता, कलिकट [ केरला ]

'' जो दिखता है वो होता नहीं ,
            जो होता है वो दिखता नहीं ''    

मित्रो क्या आप जानते हो ? सॉफ्टवेर का उपयोग यदि सोच - समज के, सही ढंग से किया जाये तो फायदा ही फायदा है / बिना सोचे, समजे, अंधा विश्वास कर के किया जाये तो क्या हो शकता है ? आइये मिलते है, खूबसूरत, पढ़ी, लिखी, तगड़ा बैंक बेलेंस, और बैंक की नौकरी करती वासवी से  . . . 

 

'' बेटे शाम को जल्दी घर आना, लड़के वाले आ रहे है, '' माँ ने कहा 

 

'' ओ  . . . हो माँ इतना भी क्या जल्दी है तुम्हे ? थोड़े समय तो तुम्हारे पास रहने दो '' प्यार से वासवी बोली 

 

'' क्या तू भी, बेटे पढ़ाई हो गई, बैंक में नौकरी है, घर काम शिख लिया, रसोई भी आती है, बस अब तेरा घर बस जाये, येही एक तमन्ना है '' माँ ने समजाते हुए कहा 

'' नहीं माँ अभी नहीं '' वासवी ने कहा 
सा दो तीन बार हुआ तो माता - पिता ने सोचा किसी को पसंद करती होगी, हमे बता नहीं  पाती होगी, हम ही पूछ लेते है, अगर लड़का और घर परिवार अच्छा होगा तो हम मना नहीं करेंगे 
'' बेटे बार बार तुम्हारी ना सुन के लगता है, तुमने किसी को पसंद कर लिया है ? हमें बता दो, जांच पड़ताल कर ले '' माता - पिता ने बड़े प्यार से पूछा 
'' जी पिताजी, आपकी सोच सही है, विश्वास नाम है उसका, हम फेसबुक के जरिये दोस्त बने, दोस्ती कब 
प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला '' वासवी ने बताया 

'' ठीक है बेटे तू हमे उसका बायो डेटा दे हम पता कर ते है '' 
माता - पिता बोले बायो देखते ही . . . दंग रह गए, सोचा जिस शहर से है वहां हमारी जान पहेचान वाले कोई भी नहीं है, हमारी ज्ञाति के भी नहीं  है, पूछे भी तो किसको ? तनखाह भी वासवी से कम है, कैसे दे शकते है अपनी लाड़ली को ? 
'' बेटा बात कुछ जम नहीं रही है, मन मानने को तैयार नहीं है '' पिताजी बोले 
'' पर पिताजी, आप एक बार मील तो लो, मैं पांच साल से जानती हुं, मुझे उस पर पूरा यकीन है, हां पिताजी एक बात और मैं ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसे आपका नाम ख़राब हो, नाही उसने कभी ये चाहा, हम फोन -  व्हॉट्सएप पर ही मिलते थे, दो तीन बार शादी में दोस्तों के साथ मिले है  '' वासवीने कहा 
'' ठीक है मिल लेते है, पर बेटा मेरा मन नहीं मानता है,'' पिताजी बोले 
         
विश्वास के घर आये, माता - पिता - भाई - बहन / मिले बात चित की, उत्तर बाद में देंगे, और घर आये, माता - पिता की अनुभवी आँखो ने देख लिया, बायो डेटा में जो था और हकीकत में उसके घर जा के जो अनुभव किया वो कुछ हजम नहीं होता था, वासवी यहां खुश नहीं रहे पायेगी, दोनों ने वासवी को समजाया, मनाया, पर प्यार में पागल वासवी को विश्वास की कमी भी खूबी लग रही थी, बेटी की जिद  के आगे जुकना पड़ा मां बाप  को  शादी की तैयारियां होने लगी, महेमान भी आने लगे, चारों ओर खुशी के माहोल में शहनाई बजने लगी, 
'' बेटी तेरा बैंक बैलेंस ज्यादा है, पता नहीं मेरा मन क्यों गभरा रहा है, तू एक काम कर तेरा A T M कार्ड यहाँ रख दे शादी के बाद ले जाना, क्युकी अभी तुरंत तो तुजे उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी, '' पिता ने चिंतित होते हुए सुझाव दिया 
''पिताजी आप भी ना बहुत ही चिंता करते हो, मेरे अलावा ये कार्ड किसी से नहीं खुलेगा, मैं पूरा खयाल रखुंगी,'' वासवी बोली 
बारात आई, सभी ख़ुशी से नाच गा रहे थे, सभी रस्म विधि विधान से हो रही थी की. . . जुत्ता छुपा ने  की रस्म आई, सालियो ने कहा '' जीजाजी पैसे दो जूत्ते लो '' फटाक से विश्वास ने पांच हजार  निकला और दे दिए सभी सालियो को, सब देखते ही रहे गए लड़कियां खुश हो गई, पुरे पंडाल में जमाई की वाह वाह हो गई, बिदाई की घड़ी आयी और वासवी चली पति के घर 
शादी के दूसरे ही दिन  . . . विश्वास ने कहा '' वासवी मुझे ५००० रुपये चाहिए क्या अभी तू दे शकती हो ? '' सोच में पड गई वासवी, फीर कुछ सोच कर रुपये दे दीये, तभी विश्वास ने कहा '' बुरा मत मानना बाद में दे दूंगा, तुम्हारी बहनों  खुश करने के लिए, ये जरुरी था, सब की वाह वाह भी तुम्हें मिली '' 
शादी के तीसरे दिन दोनों हनीमून के लिए जा रहे थे तो सास ने कहा '' बेटी अपने गहने और भारी कपडे मुझे दे दो मैं संभाल के रख दू, ''
'' हां मम्मी सही कहे रही है, पांच दिन का पैकेज है और जा के आने में आठ दस दिन तो लग ही जायेंगे ''
 
'' जी मम्मीजी जैसा आप ठीक समजे '' ये बोल कर वासवी गहने और कपडे दे दीये 
तीन दिन खूब मजे किये, चौथे दिन सुबह में विश्वास ने कहा '' हम आज अभी घर चलते है, अब होटल में नहीं रह शकते, '' अचानक ये बात सुन के चौंक गई वासवी, कुछ समज में नहीं आया, और पूछा '' क्यु ? क्या हुआ ? ''

धीरे से अपना फोन ऑन कर दिया, इस बात से अनजान विश्वास ने कहा '' मुझे कुछ ठीक नहीं लगता, तुम्हे 
मेरी बात पर यकीन है तो सवाल मत पूछो, घर जाके सब कुछ बता दुगा, और हां इस वक्त मेरे पास रुपये 
नहीं है तो तुम होटल का बिल भरदो और टिकिट भी ऑन लाइन ले लो, मैं सामान पैक करके निचे आ रहा हु '' 
'' ठीक है जैसा आप सही समजे '' वासवी ने कहा और निचे चली गई 
सोच रही थी की ये बात कुछ हजम नहीं होती है क्युकी  हनीमून के लिए आना, जाना, होटल, घुमना सब कुछ तो उसने ऑन लाइन बुक किया 
था तो अब वो मुझे क्यु होटल बिल और टिकिट के लिए बोलता है ? मुझे बहुत ही संभल कर रहेना पडेगापापा की बात सच लगती है , 
     
मैनेजर से बिल और टिकिट के रुपए दिए, फिर पूछा '' क्या हमने पांच दिन का पैकेज और वापसी की 
टिकिट ऑनलाइन आपके यहां बुक किया था ? ''
 
'' जी , नहीं मैडम , '' मैनेजर ने कहा 
'' जी क्या आप मुझे मैंने जो पेमेंट किया उसका बिल दे शकते हो ? '' वासवी ने पूछा 
'' जी जरूर मैडम, ये लीजिये '' मैनेजर ने कहा 
विश्वास तो मुझे बहुत ही चाहता है तो क्यु मुझसे झूठ बोला ?  क्यु कहा मुझे बिल भरने और टिकिट लेने के 
लिए ? कुछ सोच कर मन में तय कर लिया और विश्वास के गई 
घर आ गए, दो तीन दिन बहुत ही मजे में व्यतीत हुए, मानो कुछ हुआ ही नहीं, माँ के घर भी जा के आयी, वासवी को लगा सपने देखे थे वो सच होने जा रहे है, खुश हो गई, जो घटना घटी वो भूल जाने में ही भलाई है, और माँ पिताजी को अभी कुछ नहीं बताना ये तय कर लिया 
एक दिन सुबह में सास ने कहा '' बेटी कल से तुम्हे नौकरी पर जाना है, सुबह का नास्ता, दोपहर खाना, बाकि काम निपटा के जाना, शाम का खाना मैं बना दूगी, बाकि काम तू कर लेना, भारी कपडे और गहने मैंने अपने पास सम्हाल के रखे है, ठीक है ? '' 
'' जी, मम्मी जी जैसा आप ठीक समजे '' वासवी ने कहा, सोचा प्रेम विवाह किया है इस लिए ये लोग मुझे अपनाने में जीजक रहे है , कोई बात नहीं विश्वास तो मुझे चाहता है, परिवार को भी मैं अपने प्यार से अपना बना लुंगी 
नई जिंदगी, नए लोग, घर का काम, बैंक जाना, हसी ख़ुशी दिन बीतते गए, विश्वास भी बहुत प्यार करता, माता - पिता भी खुश थे, समय को पंख लगा, सातवें आसमान में उड़ने लगी वासवी, छे महीने गुजर गए, पता ही नहीं चला
 
एक दिन परिवार वाले शादी में गए, वासवी - विश्वास को छूट्टी  ना  मिल पाने की वजह दोनो घर में रहे, रात में विश्वास ने कहा '' वासवी , मुझे रुपयो की जरूरत है , पिताजी भी नहीं है, मेरे पास इतने नहीं है, अभी तुम देदो, पिताजी आ जाएगे मैं तुम्हे लौटा दुगा, '' 
'' कितने चाहिए ?'' वासवी ने पूछा,
 
'' ५०,००० की जरूरत है '' विश्वास ने कहा 
'' क्या ??? कीस लिए ??? '' वासवी ने हैरान होकर पूछा 
'' हां, मैं जनता हु तुम्हे हैरानी होगी, पर क्या करू ? सच में मुझे जरूरत है, मैं तुम्हे पक्का लौटा दुगा,''
'' लेकिन, अभी रात में इतनी बड़ी रकम मेरी पर्स में नहीं है, कल बैंक से लौटते वक्त लेकर आउंगी, '' वासवी ने कहा
 
माथा खनक गया वासवी का, सोच ने लगी ये माजरा क्या है ? होटल बिल, टिकिट, वो रुपये मुझे देने की तो बात नहीं, ये तो और मांग रहा है, विश्वास के महीने की तनखाह के बारे में भी आज 
तक मुझे कुछ नहीं बताया, कुछ तो दाल में काला है, कुछ तो करना पडेगा, माँ से बात करु, पिताजी का डर सही तो नहीं ?
 
दूसरे दिन माँ के पास आई और पूरी बात बताई, पिताजी दंग रहे गए, बोले '' तू यहाँ आजा, हमे नहीं 
रहना, ''

'' पर पिताजी उसे सबक तो शिखाना पडेगा, मैंने पहले भी रुपए दिए है वो भी लौटाया नहीं '' वासवी ने कहा
 
'' क्या ? पहले भी का क्या मतलब? '' पिताजी चौंक कर बोले 

बेटी ने पूरी बात दोनों को बताई, कितना प्यार से रखता है, कितनी फ़िक्र करता है, सबकुछ बताया, सास किताना काम करवाती है, सास अच्छे कपडे और गहने ना खुद पहनती है,  ना मुझे पहनने देती है 

'' तो अब क्या करना है ? '' माँ बोली 
'' मैं रुपए देती हु, रेकॉर्ड भी करुँगी ताकि हमारे पास सबूत पक्का हो, अगर सब कुछ बराबर हो जायेगा तो रेकॉर्डिंग मिटा देंगे '' वासवी ने कहा 

'' पर बेटा तेरा वहा रहना खतरा भी हो शकता है, हमें चिंता रहेगी, '' पिताजी बोले 

'' आप जरा भी चिंता ना करे, वो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा, मेरा फोन भी वो नहीं खोल शकता, '' वासवी 
बोली 
वासवी ने रुपए देते वक्त पूरी सावधानी बरती, सास ससुर को ये बात बताई, वो बोले '' शादी के बाद क्या तेरा और मेरा सब कुछ अपना ही तो है, कोई बात नहीं, तू अपना काम कर '', वासवी को समज में आ गया यहाँ तो पूरी की पूरी दाल काली है, सास और ननंद  की टकटक चालू हो गई, विश्वास भी गाली गलोच करने लगा, नौकरी छोड़ घर में पड़ा रहता, बार बार रुपए मांगता, ना बोल ने पर वासवी के साथ जोर जोर से चिल्लाता और ज़गडा करता, अड़ोस पड़ोस वाले सुनते, पानी सर से ऊपर आया तो एक दिन बैंक जाने के बजाय माँ के घर आयी, 
 
सब कुछ बता दिया माता - पिता को, और कोर्ट केस कर दिया, सगे, सबंधी, दोस्त सभी जानते थे वासवी 
सही है, प . . . र . . . बिना सबूत क्या होगा? ये ही बात सभी को खाये जा रही थी, तभी वासवी बोली ''  कोर्ट
 तो चलो सबूत भी आ जाएगा वो भी इतना तगड़ा की एलिमनी भी देनी पड़ेगी, मुझसे जो रुपए लिए थे वो भी देने 
ही पड़ेंगे
'' 
कोर्ट में . . . विश्वास के पडोशी और वासवी के मोबाईल ने कमाल कर दिया, वासवी जित गई, जितने रुपए विश्वास ने लिए 
थे ], गहने, भारी कपडे, विवाह की डायमंड रिंग, वो तो मिल ही गए, एलिमनी भी मिली, वो एलिमनी के रुपए शहीद जवान फंड में, वासवी ने जमा करवा दीये 

KUTCH GURJARI

T : + 91 9322 880 555
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